जिद म्हं मास्टर बण जाउंगा,
जिद म्हं मास्टर बण जाउंगा,
सारी धरती आसमान सर पअ् ठाउंगा,
क्यातैं राजी होरी सो मैडमांे,
मैं भी किसे मास्टरणी तै ब्याह करवाउंगा,
आच्छा सरकारी नाज खांवागें,
क्यातै बालकां नै पढ़ावांगे,
वा भी नींद म्हं बैठी उंघगी,
मेरअ् खातर स्वेटर गुनेगी,
अर् मैं भी आपणे गोधू का टोपा बणवाउंगा,
जिद मै मास्टर बण जाउंगा,
बिना नहाए फेर आवगी बासी,
बालका पै मंगवाके पिउंगा लासी,
मिड-डे-मील का राषन खाउंगा,
धर के पां मेज पै सो जाउंगा,
बालक भी खूब ए मौज उडावगें,
खेलदे-खेलदे मेरी टांगा तलै कै लिकड़ जावंगे,
जै कोणसा फसगा! उसपै एक बीड़ी का बंडल मंगवाउंगा
जद मैं मास्टर बण जाउंगा,,
खूब मारूंगा फरलो,
चाहे कोए किमे करलो,
सरपंच तै घणा प्यार सै,
बीओ आपणा रिष्तेदार सै,
बालक भी तो चार सैं,
मैं तो नुए मजे उडाउंगा,
जद मैं मास्टर बण जाउंगा,,,
राजनीति का ख्ूाब जमकै खेलूंगा खेल,
सारा नै पास करूंगा किसे न नहीं करूं फेल,
कोए अपरोच आला कोए पास हो अक्ल तै,
रह्या-सह्या का काम काढूंगा नक्ल तै,
नू कर कार कै नै बालकां नै आपणी बराबरी पै लाउंगा,
जद मैं मास्टर बण जाउंगा,,,
पार्टी कै टेम पै मन्नै मारली थी घूंट,
जितनी बात पहलंा कही वो थी झूठ,
सरकारी अर् प्राइवेट म्हं फर्क जाणूं रै,
सरकारी स्कूलां के मास्टर क्यूं बणगे परमाणु रै,
बालका पै इसा बम फोड़ देवं सैं,
हालात नै देखके बालक स्कूल छोड़ देवं सैं,
इननै सुधारण खातर कोए जत्न बणाणा होगा,
जवान-जवान छोरा नै, डंका फेर बजाणा होगा,
गुरु जीयां का दर्जा इन्नै फेर दुवाणा होगा,
सारे बालक पढ़ा पाछै, खुषहाल हरियाणा होगा,
फेर कोए मास्टर कोनी कहवै,
मैं धरती सर पै ठाउंगा,
जद मैं मास्टर बण जाउंगा,,,
सारे बालकां नै रज कै पढ़ाउंगा,
मिड-डे-मील का राषन नहीं खाउंगा,
अर् मेरे बालकां नै भी,
सरकारी स्कूल म्हं पढ़ाउंगा
षिक्षा, स्कूल और देष बचाके थाम यो एक एंडी काम करो,
आगली पीढ़ी याद करै, इसा के कोए काम करो,
एंडी मास्टर बणके नै, का उंचा नाम करो,
दिन-रात एक बणाकै, मेहनत सबेरे-षाम करो,
मैं संदीप कंवल भुरटाणे आला,
मास्टर बणा पाछै भी नुए कविता सुणाउंगा,,,,
जद मैं मास्टर बण जाउंगा ;;;;9
Sunday, July 10, 2011
संदीप कंवल भुरटाना
किसे जानवर नै ना सताईयो
काल की बात थी,
काली-काली रात थी,
रात नै चाला होग्या,
गात का गाला होग्या,
काल सोमवार था,
म्हारा पाणी का वार था,
मन्नै जोडा टूटलिया गाड्डा,
अर मन्नै लाग्या ब्होत ए जाड्डा,
हिम्मत करके खेत म्हं आग्या,
एकलै नै ब्होत ए डर लाग्या,
इतणै म्हं आग्या मेरा काका,
दोनूंआ नै मिलके खोल्या नाका,
काका चल्या गया,
खतरा फेर ढल्या गया,
एक बिल म्हं पाणी बड़ग्या,
युद्व सा छिड़ग्या,
एक मूसा बिल म्हं तै लिकड के भाजगा,
अर मेरी जान सी काडगा,
लागै घणा स्याणा था,
एक आंख तै काणा था,
लाम्बी उसकी पूंछ थी,
किसारी बरगी मूंछ थी,
खामखां मेर गेल्यां फहगा,
जंादा-जांदा न्यू कहगा,
अर बोल्या भाई,
कितणी ए मेहनत करले,
कुछ नहीं होवगा,
तु तो सारी उम्र नुए,
खेतां म्हं सोवगा,
ब्ेाशक खेत कअ बाहर कै,
तार गाड़ दिए,
जै इसमे किम होज्या,
मेरी मूछ पाड़ दिए,
या कहकै बिल म्हं बड़गा,
अर मै चिन्ता म्हं पड़गा,
मैं सोच करण लाग्या,
एक विचार मन म्हं आग्या,
इबकै खेत नै खाली छोडद्या,
अर् हाल फाली सब तोड़द्या,
फेर मेरा भीतरला घबराया,
दिमाक फेर चकराया,
जै इबकै नहीं बोवगा,
नाज कितै होवगा,
सारै बाजै बजा कै,
बाजरा बो दिया,
टाल के मुसा की बात,
सबे किमे खो दिया,
क्ुण म्हं तै हाल पड़ग्या,
भई उसे साल काल पड़ग्या,
फेर म्हं उसे बिल कै धौर्अ आया,
उसे मुसे तै दोबारा बतलाके आया,
रै वो मूसा नहीं रै मूसा का भेश था,
वो तो भगवान गणेष था,,
मूसां भेश म्हं आया था,
मैं उसनै ब्होत समझाया था,
गड्डे मुर्दे ना उखाड़ियो,
रै लोगो किसे का घर ना उजाड़ियो,
अर् मेरअ् तो समझ म्हं आगी,
आपणै तो अक्ल लागी,
अर् खूब कमाइयो, खूब खाइयो,
पर किसे जानवर नै ना सताइयो
संदीप कंवल भुरटाना
काल की बात थी,
काली-काली रात थी,
रात नै चाला होग्या,
गात का गाला होग्या,
काल सोमवार था,
म्हारा पाणी का वार था,
मन्नै जोडा टूटलिया गाड्डा,
अर मन्नै लाग्या ब्होत ए जाड्डा,
हिम्मत करके खेत म्हं आग्या,
एकलै नै ब्होत ए डर लाग्या,
इतणै म्हं आग्या मेरा काका,
दोनूंआ नै मिलके खोल्या नाका,
काका चल्या गया,
खतरा फेर ढल्या गया,
एक बिल म्हं पाणी बड़ग्या,
युद्व सा छिड़ग्या,
एक मूसा बिल म्हं तै लिकड के भाजगा,
अर मेरी जान सी काडगा,
लागै घणा स्याणा था,
एक आंख तै काणा था,
लाम्बी उसकी पूंछ थी,
किसारी बरगी मूंछ थी,
खामखां मेर गेल्यां फहगा,
जंादा-जांदा न्यू कहगा,
अर बोल्या भाई,
कितणी ए मेहनत करले,
कुछ नहीं होवगा,
तु तो सारी उम्र नुए,
खेतां म्हं सोवगा,
ब्ेाशक खेत कअ बाहर कै,
तार गाड़ दिए,
जै इसमे किम होज्या,
मेरी मूछ पाड़ दिए,
या कहकै बिल म्हं बड़गा,
अर मै चिन्ता म्हं पड़गा,
मैं सोच करण लाग्या,
एक विचार मन म्हं आग्या,
इबकै खेत नै खाली छोडद्या,
अर् हाल फाली सब तोड़द्या,
फेर मेरा भीतरला घबराया,
दिमाक फेर चकराया,
जै इबकै नहीं बोवगा,
नाज कितै होवगा,
सारै बाजै बजा कै,
बाजरा बो दिया,
टाल के मुसा की बात,
सबे किमे खो दिया,
क्ुण म्हं तै हाल पड़ग्या,
भई उसे साल काल पड़ग्या,
फेर म्हं उसे बिल कै धौर्अ आया,
उसे मुसे तै दोबारा बतलाके आया,
रै वो मूसा नहीं रै मूसा का भेश था,
वो तो भगवान गणेष था,,
मूसां भेश म्हं आया था,
मैं उसनै ब्होत समझाया था,
गड्डे मुर्दे ना उखाड़ियो,
रै लोगो किसे का घर ना उजाड़ियो,
अर् मेरअ् तो समझ म्हं आगी,
आपणै तो अक्ल लागी,
अर् खूब कमाइयो, खूब खाइयो,
पर किसे जानवर नै ना सताइयो
संदीप कंवल भुरटाना
Friday, July 8, 2011
Haryana ke Jan Nayak Tau Devilal
Haryana ke Jan Nayak Tau Devilal ko Samrpit..........ye Chand Line......
संदीप कँवल भुरटाना
ओ ताऊ .........आज्या नै तन्ने पुकारे हरियाणा
भोली भाली जनता नै यो लुट्टे बणके स्याणा ......
जिद भी हरियाणे मै ताऊ congress की सरकार आई सै
आंदे आंदे इसने ताऊ लूटपाट मचाई सै
गोते मार के दाल ना पांदी रोवे मेरी ताई सै
चीनी चावल सबे कीमे महंगा लाठी तोड महंगाई सै
गरीब आदमी न ताऊ पडा बासी टिकड़ खाणा
ओ ताऊ .........आज्या नै तन्ने पुकारे हरियाणा
गरीब आदमी का ताऊ इब होन्दा नहीं गुजारा
१५० रुपये कमा के लाव २०० का खर्चा आरा
छोरी कै जाण खातर ताऊ भाड़ा नहीं पारा
अमीर आदमी और भी अमीर होन्दा जारा
इस महंगाई का ताऊ कोए पडगा जत्न मनाणा
ओ ताऊ .........आज्या नै तन्ने पुकारे हरियाणा
टिम टिम करके लाइट भाजगी एक बार फेर आ ताऊ
नहर सूखगी पानी कोन्या वो ए काम दिखा ताऊ
बुड्डा की तन्ने पेंशन बनाई दूसरा का ठप्पा मिटा ताऊ
होरी किसान की रे रे माट्टी फेर खुशहाल बणा ताऊ
इस जनता के हाली नै पड़ा फंदा गल मह लटकाणा
ओ ताऊ .........आज्या नै तन्ने पुकारे हरियाणा
इस रूस्म पाटत नै छोडके सारे भेद मिटा लो
घणे प्यार तै कहूं लोगों एक बार चश्मे का बटन दबा लो
सारे दुःख दूर होज्यांगे चाहे इतिहास ठालो
कांग्रेस गेल्यां लाग के बेशक गोडे तुड़वा लो
हर एक जणा का काम होवेगा या कहवे संदीप भुरटाना
ओ ताऊ .........आज्या नै तन्ने पुकारे हरियाणा
ओ ताऊ .........आज्या नै तन्ने पुकारे हरियाणा
ओ ताऊ .........आज्या नै तन्ने पुकारे हरियाणा
संदीप भुरटाना
संदीप कँवल भुरटाना
ओ ताऊ .........आज्या नै तन्ने पुकारे हरियाणा
भोली भाली जनता नै यो लुट्टे बणके स्याणा ......
जिद भी हरियाणे मै ताऊ congress की सरकार आई सै
आंदे आंदे इसने ताऊ लूटपाट मचाई सै
गोते मार के दाल ना पांदी रोवे मेरी ताई सै
चीनी चावल सबे कीमे महंगा लाठी तोड महंगाई सै
गरीब आदमी न ताऊ पडा बासी टिकड़ खाणा
ओ ताऊ .........आज्या नै तन्ने पुकारे हरियाणा
गरीब आदमी का ताऊ इब होन्दा नहीं गुजारा
१५० रुपये कमा के लाव २०० का खर्चा आरा
छोरी कै जाण खातर ताऊ भाड़ा नहीं पारा
अमीर आदमी और भी अमीर होन्दा जारा
इस महंगाई का ताऊ कोए पडगा जत्न मनाणा
ओ ताऊ .........आज्या नै तन्ने पुकारे हरियाणा
टिम टिम करके लाइट भाजगी एक बार फेर आ ताऊ
नहर सूखगी पानी कोन्या वो ए काम दिखा ताऊ
बुड्डा की तन्ने पेंशन बनाई दूसरा का ठप्पा मिटा ताऊ
होरी किसान की रे रे माट्टी फेर खुशहाल बणा ताऊ
इस जनता के हाली नै पड़ा फंदा गल मह लटकाणा
ओ ताऊ .........आज्या नै तन्ने पुकारे हरियाणा
इस रूस्म पाटत नै छोडके सारे भेद मिटा लो
घणे प्यार तै कहूं लोगों एक बार चश्मे का बटन दबा लो
सारे दुःख दूर होज्यांगे चाहे इतिहास ठालो
कांग्रेस गेल्यां लाग के बेशक गोडे तुड़वा लो
हर एक जणा का काम होवेगा या कहवे संदीप भुरटाना
ओ ताऊ .........आज्या नै तन्ने पुकारे हरियाणा
ओ ताऊ .........आज्या नै तन्ने पुकारे हरियाणा
ओ ताऊ .........आज्या नै तन्ने पुकारे हरियाणा
संदीप भुरटाना
संदीप कंवल भुरटाना ब्याह
बाबा पीर की जय
म्हारे गामां के ब्याह के बारे में पूरा लेखा-जोखा, हिसाब-किताब अर् ब्याह जडअ् तै ष्षुरू होवे ओडे तै लैके आखर तक पहंुचाण की कोषिष करी सै, उम्मीद सै तामनै जरूर पंसद आवगी
संदीप कंवल भुरटाना
हर किसे कअ् चड्ढे चा,
जद होंदा होवै ब्याह,
गांमा की पुराणी रीत,
घरां गाए जावैं गीत,
सात-ग्यारह दिन का लग्न आवै,
छींक -छीक के नै मिठाई खावैं,
फेर दैंव घर आले बाना,
मीठा भैके रोटी खाणा,
चिन्ता भी फेर रोज हौवे,
उन दिनां म्हं मौज हौवे,
ब्याह तै पहलड़ा दिन भातियां का आणा,
गाम आलां का खाणा चालू करवाणा,
फेर मामे भरैं भात,
ब्होत करणी पडै़ खुबात,
भाई-बाहण कै सहारा लावै,
बूढ़ला की रीत निभावै,
लिखें भात खुलैं बही,
उसे रात फेर चढे तई,
गुड़ चीनी की चाष्णी छणे,
लाडू, जलेबी मिठाई बणे,
कोए बोचण म्हं फैदा ठाज्या,
अंधेरा म्हं लाडू खाज्या,
ब्याह का बड़ा मीठा खेल,
पहलड़ा दिन नै कहवां मेल,
बाने काढे गिण-गिण,
फेर आवै ब्याह आला दिन,
पहलां बनड़ा का तैल तारैं,
फोटू आलै भी झिमका मारैं,
सारे सिंगर डोल कै होज्या तैयार,
काडदे बनड़ा का त्यौहार,
बनड़ा नै नाई नुवांवै,
आच्छा साबण पाणी लावैं,
लाल लत्ता सिर उड़ा रै,
फेर मामा पाटड़ा पै तै तारै,
फेर बनडा कै जींजा की आवै बारी,
पहला टोपी मंदिर जाण की तैयारी,
चढ़ घोड़ी मंदिर म्हं जाणा,
फेर भगवान नै षीष नवाणा,
डीजै पै बाजै गाणे हिट,
यार दैवं सारे गिफट,
भाभी आंख्या म्हं कालस घालै,
मांगै नेक फेर नाड़ हालै,
फेर बाराती चालै होके लैट,
आगलै गामै फेर हौवे फेट,
करकै नै पूरी खुबात,
आगलै गांम फेर पहुचै बारात,
औडे मिलणी पै बुढे आवैं,
माला घाल गलै मिल जावैं
खातिरदारी की पहली निषानी,
कंपा कोला और षरबत का पानी,
दैव सालै जतावैं प्यार,
मिनट म्हं कहवै रिष्तेदार,
फेर पंडत जी आवैं,
रस्मुना सा करकै जावैं,
थोड़ी पुराणी रीत निभावैं,
बरी का सामान भी ले ज्यावैं,
फैर हौवे फेरां की तैयारी,
ब्हुंआ कें सिंगार म्हं टेम लागै भारी,
छोरे भी डीजै पै गाणै लगवांवै,
नाच-नाच के धूमैं ठावैं,
घणखरे ब्होत ए माच्चैं,
बेतल मुंह कअ् लाकै नाच्चै,
आज्या छोरीआलां का घर,
ढोलकियां की आरी मर,
फेर साली निम झारैं,
जोर का फटकारा मारैं,
एक रिबन भी कटवांवै,
राम दणी सी नैक लेज्यावैं,
कई छोरे अल्बाध कर ज्यावैं,
सपरे मार धोली कर ज्यावैं,
मजै आवैं जिब भतेरे,
फेर षुरू हो ज्यावैं फेरे,
छोरी नै लेके मामा आवै,
राम दणी सी पाटड़ा पै बिठावै,
पंडत जी ब्होत बार लगावै,
पिसे देदीं ए फेरे तावले करावै,
छोरी आलै दैंव ब्होत सामान,
फेर वो घालै कन्यादान,
घणी गर्मी म्हं चालै बीजणे,
सरी लुगाई दैंव सिटणे,
बनडे की बेबे ए,,,,,,,,,
भीड़ म्हं नहीं मिलै सीट,
फेर छोरी दैंव गिफट,
कैमरा आला गैंल्या करैं कैंस,
बोली खाली ना मारिए फलैस,
घूम-घूम सात फेरें हो ज्यावैं,
फेर सारे बाराती खाणा खावैं,
मेल-जोल म्हं होवैं सब फिदा,
आखर म्हं फेर हौवे विदा,
बूढे़-बडेरे की हौव मान तान,
कांबल, गुट्ठी का हौव दान,
लाल-लाल सी ठावै किताब,
सारै ब्याह का हौव हिसाब,
फेर आखरी घड़ी सै आई,
बारात की फेर हौव विदाई,
सबकी आंख्या म्हं आंसू आवैं,
जिद घर तै एक आदमी जावैं,
कुछैक घंटा म्हं मिटै चा,
न्यू हो ज्यावै सै भाईयों ब्याह,
हर किसे कअ चडढे चा,
जद होंदा हौवे ब्याह।।।।।।
संदीप कंवल भुरटाना
म्हारे गामां के ब्याह के बारे में पूरा लेखा-जोखा, हिसाब-किताब अर् ब्याह जडअ् तै ष्षुरू होवे ओडे तै लैके आखर तक पहंुचाण की कोषिष करी सै, उम्मीद सै तामनै जरूर पंसद आवगी
संदीप कंवल भुरटाना
हर किसे कअ् चड्ढे चा,
जद होंदा होवै ब्याह,
गांमा की पुराणी रीत,
घरां गाए जावैं गीत,
सात-ग्यारह दिन का लग्न आवै,
छींक -छीक के नै मिठाई खावैं,
फेर दैंव घर आले बाना,
मीठा भैके रोटी खाणा,
चिन्ता भी फेर रोज हौवे,
उन दिनां म्हं मौज हौवे,
ब्याह तै पहलड़ा दिन भातियां का आणा,
गाम आलां का खाणा चालू करवाणा,
फेर मामे भरैं भात,
ब्होत करणी पडै़ खुबात,
भाई-बाहण कै सहारा लावै,
बूढ़ला की रीत निभावै,
लिखें भात खुलैं बही,
उसे रात फेर चढे तई,
गुड़ चीनी की चाष्णी छणे,
लाडू, जलेबी मिठाई बणे,
कोए बोचण म्हं फैदा ठाज्या,
अंधेरा म्हं लाडू खाज्या,
ब्याह का बड़ा मीठा खेल,
पहलड़ा दिन नै कहवां मेल,
बाने काढे गिण-गिण,
फेर आवै ब्याह आला दिन,
पहलां बनड़ा का तैल तारैं,
फोटू आलै भी झिमका मारैं,
सारे सिंगर डोल कै होज्या तैयार,
काडदे बनड़ा का त्यौहार,
बनड़ा नै नाई नुवांवै,
आच्छा साबण पाणी लावैं,
लाल लत्ता सिर उड़ा रै,
फेर मामा पाटड़ा पै तै तारै,
फेर बनडा कै जींजा की आवै बारी,
पहला टोपी मंदिर जाण की तैयारी,
चढ़ घोड़ी मंदिर म्हं जाणा,
फेर भगवान नै षीष नवाणा,
डीजै पै बाजै गाणे हिट,
यार दैवं सारे गिफट,
भाभी आंख्या म्हं कालस घालै,
मांगै नेक फेर नाड़ हालै,
फेर बाराती चालै होके लैट,
आगलै गामै फेर हौवे फेट,
करकै नै पूरी खुबात,
आगलै गांम फेर पहुचै बारात,
औडे मिलणी पै बुढे आवैं,
माला घाल गलै मिल जावैं
खातिरदारी की पहली निषानी,
कंपा कोला और षरबत का पानी,
दैव सालै जतावैं प्यार,
मिनट म्हं कहवै रिष्तेदार,
फेर पंडत जी आवैं,
रस्मुना सा करकै जावैं,
थोड़ी पुराणी रीत निभावैं,
बरी का सामान भी ले ज्यावैं,
फैर हौवे फेरां की तैयारी,
ब्हुंआ कें सिंगार म्हं टेम लागै भारी,
छोरे भी डीजै पै गाणै लगवांवै,
नाच-नाच के धूमैं ठावैं,
घणखरे ब्होत ए माच्चैं,
बेतल मुंह कअ् लाकै नाच्चै,
आज्या छोरीआलां का घर,
ढोलकियां की आरी मर,
फेर साली निम झारैं,
जोर का फटकारा मारैं,
एक रिबन भी कटवांवै,
राम दणी सी नैक लेज्यावैं,
कई छोरे अल्बाध कर ज्यावैं,
सपरे मार धोली कर ज्यावैं,
मजै आवैं जिब भतेरे,
फेर षुरू हो ज्यावैं फेरे,
छोरी नै लेके मामा आवै,
राम दणी सी पाटड़ा पै बिठावै,
पंडत जी ब्होत बार लगावै,
पिसे देदीं ए फेरे तावले करावै,
छोरी आलै दैंव ब्होत सामान,
फेर वो घालै कन्यादान,
घणी गर्मी म्हं चालै बीजणे,
सरी लुगाई दैंव सिटणे,
बनडे की बेबे ए,,,,,,,,,
भीड़ म्हं नहीं मिलै सीट,
फेर छोरी दैंव गिफट,
कैमरा आला गैंल्या करैं कैंस,
बोली खाली ना मारिए फलैस,
घूम-घूम सात फेरें हो ज्यावैं,
फेर सारे बाराती खाणा खावैं,
मेल-जोल म्हं होवैं सब फिदा,
आखर म्हं फेर हौवे विदा,
बूढे़-बडेरे की हौव मान तान,
कांबल, गुट्ठी का हौव दान,
लाल-लाल सी ठावै किताब,
सारै ब्याह का हौव हिसाब,
फेर आखरी घड़ी सै आई,
बारात की फेर हौव विदाई,
सबकी आंख्या म्हं आंसू आवैं,
जिद घर तै एक आदमी जावैं,
कुछैक घंटा म्हं मिटै चा,
न्यू हो ज्यावै सै भाईयों ब्याह,
हर किसे कअ चडढे चा,
जद होंदा हौवे ब्याह।।।।।।
संदीप कंवल भुरटाना
Thursday, April 23, 2009
उस बच्ची को नही मालूम
Sandeep kanwal
वह बच्ची, जिसकी उम्र
दस-बारह वर्ष के करीब है और जिसने
अपनी दो कोमल उँगलियों के बीच
फँसा रखे हैं पत्थर के दो चिकने टुकड़े
इस भीड़ भरी बस में
निकालने की करती है कोशिश
अपने गले से
अनुराधा पौडवाल की आवाज।
पत्थर के इन दो चिकने टुकड़ों से
निकालती है वह
ढेर सारी फिल्मी धुनें,
भगवान के भजन और
सफर के गीत।
इस भीड़ भरी बस में भी
लोग सुनते हैं उसके छोटे गले से
अनुराधा पौडवाल की छोटी आवाज
और देखते हैं
बहुत ही तेज गति से चलने वाली
उसकी दो उँगलियों के बीच
पत्थरों का आपस में टकराना।
उस बच्ची को नहीं है मालूम
पत्थर के इन्हीं दो टुकड़ों से, जिनसे
वह निकालती है फिल्मों की धुनें और
जीवित रहने की थोड़ी सी गुंजाइश
उन्हीं पत्थरों के टकराने से निकलती है
चिंगारी।
उस बच्ची को नहीं है मालूम, जब
इस सृष्टि की हुई शुरुआत, तब
लोगों ने बसने से पहले, सबसे पहले
ईजाद की थी आग
इन्हीं दो पत्थरों को टकराकर।
वह बच्ची, जिसकी उम्र
दस-बारह वर्ष के करीब है और जिसने
अपनी दो कोमल उँगलियों के बीच
फँसा रखे हैं पत्थर के दो चिकने टुकड़े
इस भीड़ भरी बस में
निकालने की करती है कोशिश
अपने गले से
अनुराधा पौडवाल की आवाज।
पत्थर के इन दो चिकने टुकड़ों से
निकालती है वह
ढेर सारी फिल्मी धुनें,
भगवान के भजन और
सफर के गीत।
इस भीड़ भरी बस में भी
लोग सुनते हैं उसके छोटे गले से
अनुराधा पौडवाल की छोटी आवाज
और देखते हैं
बहुत ही तेज गति से चलने वाली
उसकी दो उँगलियों के बीच
पत्थरों का आपस में टकराना।
उस बच्ची को नहीं है मालूम
पत्थर के इन्हीं दो टुकड़ों से, जिनसे
वह निकालती है फिल्मों की धुनें और
जीवित रहने की थोड़ी सी गुंजाइश
उन्हीं पत्थरों के टकराने से निकलती है
चिंगारी।
उस बच्ची को नहीं है मालूम, जब
इस सृष्टि की हुई शुरुआत, तब
लोगों ने बसने से पहले, सबसे पहले
ईजाद की थी आग
इन्हीं दो पत्थरों को टकराकर।
आग जलती रहे
एक तीखी आँच ने
इस जन्म का हर पल छुआ,
आता हुआ दिन छुआ
हाथों से गुजरता कल छुआ
हर बीज, अँकुआ, पेड़-पौधा,
फूल-पत्ती, फल छुआ
जो मुझे छूने चली
हर उस हवा का आँचल छुआ
... प्रहर कोई भी नहीं बीता अछूता
आग के संपर्क से
दिवस, मासों और वर्षों के कड़ाहों में
मैं उबलता रहा पानी-सा
परे हर तर्क से
एक चौथाई उमर
यों खौलते बीती बिना अवकाश
सुख कहाँ
यों भाप बन-बन कर चुका,
रीता, भटकता
छानता आकाश
आह! कैसा कठिन
... कैसा पोच मेरा भाग!
आग चारों और मेरे
आग केवल भाग!
सुख नहीं यों खौलने में सुख नहीं कोई,
पर अभी जागी नहीं वह चेतना सोई,
वह, समय की प्रतीक्षा में है, जगेगी आप
ज्यों कि लहराती हुई ढकने उठाती भाप!
अभी तो यह आग जलती रहे, जलती रहे
जिंदगी यों ही कड़ाहों में उबलती रहे ।
Sandeep kanwal Bhurtana
इस जन्म का हर पल छुआ,
आता हुआ दिन छुआ
हाथों से गुजरता कल छुआ
हर बीज, अँकुआ, पेड़-पौधा,
फूल-पत्ती, फल छुआ
जो मुझे छूने चली
हर उस हवा का आँचल छुआ
... प्रहर कोई भी नहीं बीता अछूता
आग के संपर्क से
दिवस, मासों और वर्षों के कड़ाहों में
मैं उबलता रहा पानी-सा
परे हर तर्क से
एक चौथाई उमर
यों खौलते बीती बिना अवकाश
सुख कहाँ
यों भाप बन-बन कर चुका,
रीता, भटकता
छानता आकाश
आह! कैसा कठिन
... कैसा पोच मेरा भाग!
आग चारों और मेरे
आग केवल भाग!
सुख नहीं यों खौलने में सुख नहीं कोई,
पर अभी जागी नहीं वह चेतना सोई,
वह, समय की प्रतीक्षा में है, जगेगी आप
ज्यों कि लहराती हुई ढकने उठाती भाप!
अभी तो यह आग जलती रहे, जलती रहे
जिंदगी यों ही कड़ाहों में उबलती रहे ।
Sandeep kanwal Bhurtana
Tuesday, April 21, 2009

सन्दीप कंवल
फैशन का जमाना छोरो, करर्या कती हंगाई।
बेरा भी पाटै कोन्या, माणस सै क लुगाई॥
छोरे-छोरी कट्ठे जाकै, बदलमा कंटिग करावै सै,
लाण्डे कुड़ते पहरे दोनूं, टाइट जिन्स फंसावै सै,
जमाने की इस चाल तै हामनै पाछै नै धिकावैं सै,
रिफल-रिफल चालैं गाला म्हं, लोगां नै हंसाव सै,
हेयर ड्र्ैसर बण भकावैं सैं, आजकाल कै नाई।
बेरा भी पाटता कोना, माणस सै के लुगाई॥
70 साल की बुढ़िया होरी, अन्टी कुवावण लागी,
बुढापे के म्हं भी वा , सुरखी,पोडर लावण लागी,
माथे उपर फैन्सी टीका, रजकै सजावण लागी,
रलदू की मां भी छोरो, ब्यूटी पार्लर चलावण लागी,
द्यौली भी बणावण लागी, वा ताई भरपाई।
बेरा भी पाटै कोन्या, माणस सै कै लुगाई॥
रै फैशन तेरा बीज मरियो, गोरा काला होरा सै,
पेट उगाड़ा सुण्डी दिखै, मोटा चाला होरा सै,
60 साल का बूढे+ का, सिर काला होरा सै,
फोन पै बतलाव दादी, जान का गाला होरा सै,
सबका राम रूखाला होरा सै, आच्छी रौनक आई।ं
बेरा भी पाटता कोना, माणस सै क लुगाई॥
टवेंटी-टवेंटी का खेल चालरा, गिंडी चकरी काटगी,
छक्का मारा छोरै नै, तलै तै पैंट पाटगी,
यू भूंडी सुंडी छोरी भी कसूती रंग छाटगी,
सैन्टरफ्रैस टॉफी नै भी वा आंगलिया गैल चाटगी,
सारा जणै नैं आंटगी, या फैषन की करड़ाई।
बेरा भी पाटता कोना, माणस सै क लुगाई॥
कूण म्हं पड़ा बूढ़ा रोवै, देवैं पाणी का गलास नहीं,
अपणे बणे पराये लोगों इब किसे तै आस नहीं,
टूटण लागी डोर प्यार की, लागै कुछ भी खास नहीं,
रिसता पै कालख पूतगी, रह्या किते विस्वास नहीं,
बेटा बाप नै आंख दिखावै, दुष्मन बणगी मां जाई।
बेरा भी पाटता कोना, माणस सै क लुगाई॥
फैसन की इस आंधी म्हं, भूलगे घूंघट गाती,
उंच नीच के काम करण म्हं सरम कती न आती
काण कायदा तोड़या सारा, तोड़े सारी रीति रिवाज,
दिखावा की इस भीड़ म्हं लोगो, संस्कृति की दबी आवाज,
भुरटाणे आला कहवै आज, छोड़ो या बुराई॥
बेरा भी पाटता कोना, माणस सै क लुगाई॥
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