गामां के ठठ आडू नौजवाना नै एक संदेश
क तो खेत का काम ढंग तै कर लिया करो
अपणे बाबू का नाम रोशन कर दिया करो
उसका खंडका धरती म्ंह रगडवाके महान नहीं बणा जाया करदा
ब्याह करवाण की कह दिया करो जै उल्दे काम करा बिन ना सरदा
बाबा पीर की जय
छाती म्हं गोली लागी लाश नै देखके,,
एक बाप आपणे आसंुआ नै सारग्या,,
आज एक बाप आपणे बेटे तै हारग्या,,
अर वो बेटा जो सबमै न्यारा था,
मेरे ताउ ताई की आंख्या का तारा था,,
उसकी हालत देखके सारा गाम हारा था,
वो ओर किसे नै नहीं दोस्तो
म्हारे पडोसियां नै ए मारया था,
अर् बात कै थी,,,,,,,,,,,
एक दिन मेरा भाई भैसा नै चराण जारया था,,
औडे एक और भेंसा का टोल आर्या था,,
उस टोल म्हं एक भैंस जमा ताजा ब्यारी थी,
उस भैसां के टौल नै जमींदारा की छोरी ल्यारी थी,,
फेर एकदम इसा चाला होग्या,
छोरी कै गात का गाला होग्या,
गात गेल्यां हाथ भी पड़ग्या,
छोरी कै तो सांप लड़ग्या,
वा छोरी होई जावै आंधी,,
मेरे भाई नै पाटी बांधी,
इसा जोर का बंध लगाया,
जहर आगै जाण ना पाया,
अर छोरी नै गामै लियाया,
आकै वा ताउ रलदू तै दिखाई,
नू करके मेरे भाई नै उसकी जान बचाई,
जद् पाछै उस छोरी पक्का मन म्हं ठान लिया,,
मेरा भाई उसनै सब किमे मान लिया,
प्यार आले गुल खिलण लागै
वे लुक-छिप कै मिलण लागै,
बात घरकां तई पहुंचगी,
घरका की तो माटी कूटगी,
उसका प्यार आला भूत जागग्या
जमींदारा की छोरी नै ले के भाजगा
जमीदांरा नै मुकद्दमा बणवाया
मेरा ताउ पंचायत म्हं बुलाया
ताउ का खंडका जमीन म्हं रगडवाया
तीन लीक काडके मेरा ताउ रोदां घरा आया
फेर
दो-तीन महीने पाच्छे छोरी नै आपणा घरां फोन मिलाया
जमीदार नै फौन ठाया- अर बोल्या
बेटी चौबीसी के चौतरा पै बैठके न्याय करांगे
गामै उल्टे आ जाओ तारा ब्याह करांगे
दोनूंआ का दिमाग धक्का खाग्या
भाई उनकी भूला म्ह आग्या
उनके थे उल्टे लागै
दोनूं जणे गामै आगै
मारग्या फेरग्या उननै विश्वास
बुलाई फेर पंचायत अर खाप
पंचायत के बीच म्हं छोरी जिंदी गाड दी
अर मेरे भाई की छाती म्हं कै गोली काड दी
अर के खोट था उनका पंचायत आले फैसला करवां सकें थे
दोनूं परिवारां के रोले नै बैठकै सुलझा सकै थे
पर होणी नै कोण टाल सकै था
मेरा ताउ मारअ सारा गैल झखै था
जिद मेरा ताउ भाई की लाश नै लाण जारया था
उसका कालजा मुंह नै आरया था
कै कमी रहगी वो या ए बात विचारै था
रो-रो कै मेरा ताउ भींता कै टक्कर मारै था
जवानी म्हं गलती करण आलो, इस गलती नै बोच लिया करो
मां बाहण बाबू की रे-रे माटी होगी, थोडा सा सोच लिया करो
इन झूठे प्यार के चक्करा म्हं पडके, गहरी नींद सो जाओ सो
जिस मां बाप नै पाले पोशे, मिनटां म्हं खो जाओ सो
जवानी की गलती मैं आज हर कोए खोज्या सै
उसके इस काम पाच्छे घरकां का जीणा दूभर होज्या सै
आपणे दिमाग की नसां पर जोर दिया करो
बूढां धोरे बैठके किमे सीख लिया करो
रोलां झगडा चाल जाया करै पर प्यार प्रेम नहीं चाल्या करै
चोट लागोडी ठीक होज्या, पर या चोट रैध घाल्या करै
नौजवान भाईयो लिखियो, पढियो, नौकरी म्हं फंसियो
इन झूठै प्यार प्रेम मोह माया तै बचियो
धन्यवाद
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Wednesday, August 3, 2011
Tuesday, August 2, 2011
बदले हालात गामां कै
स्ंादीप कंवल भुरटाना
आज के गामां के हालात देख के ये चार कली लिखी सै भाईयों उम्मीद है तामनै पसंद आंवगी और जै हो सके तो गामां के हालात सुधारण की कोषिष जरूर करियो। ये चार लाइन तारै सामी सैं जिसा मन्नै लाग्या अर तामनै भी नुए लागै सै तो गाबरू गाबरू छोरा तै एक छोटी सी बात कहूं सूं, पंजाब कानी देखके , करदो काम
बदले हालात गामां कै
ना रहे गामां के वे हाल,
गाम हो लिए सैं कंगाल।।
किते भी तो ना दिखता यो भाईचारा रै,
जोहड़ सुखगा, सारै पाणी होग्या खारा रै,
धरती खोद कै नहर बणादी ना पाणी आरा रै,
फसलां का किते भी, ना सही भा थ्यारा रै,
फिरगा मोह माया का जाल,
गाम हो लिए सैं कंगाल।।
सारै रीति रिवाज मिटगे, कोए नोंदा नंुधार नहीं,
भाई-भाई न मारदे, किसे का भी प्यार नहीं,
गोड़ा नुवाण जाणा हो तो, कोए जाण नै तैयार नहीं,
सारै जणे पागल होरे, कोए रहा समझदार नहीं,
या भूंडी बणी कसूती ढाल,
गाम हो लिए सैं कंगाल।।
छोटी-छोटी बातां पै, होज्या बड़ा रौला रै,
थापड़-गुस्से की लड़ाई म्हं, उठ जा सै गोला रै,
खांच कै नै थापड़ लागज्या, होज्या छोरा धोला रै,
पुलिसिएं भी मजे लेरे, लुटै आदमी भोला रै,
सरपंचणी भी खागी माल,
गाम हो लिए सैं कंगाल।।
क्यातैं भूलगे रै लोगो ताम, थामनै कोए ख्याल नहीं,
के होगा थारे बालकां का, उनकी कोए रूखाल नहीं,
कहै भुरटाणे आला, अर्ै यो सतासी का काल नहीं,
कंवल की ना मानी तो, टूटै माया का जाल नहीं,
यो सन्दीप पूछै एक सवाल,
गाम हो लिए सैं कंगाल।।
आज के गामां के हालात देख के ये चार कली लिखी सै भाईयों उम्मीद है तामनै पसंद आंवगी और जै हो सके तो गामां के हालात सुधारण की कोषिष जरूर करियो। ये चार लाइन तारै सामी सैं जिसा मन्नै लाग्या अर तामनै भी नुए लागै सै तो गाबरू गाबरू छोरा तै एक छोटी सी बात कहूं सूं, पंजाब कानी देखके , करदो काम
बदले हालात गामां कै
ना रहे गामां के वे हाल,
गाम हो लिए सैं कंगाल।।
किते भी तो ना दिखता यो भाईचारा रै,
जोहड़ सुखगा, सारै पाणी होग्या खारा रै,
धरती खोद कै नहर बणादी ना पाणी आरा रै,
फसलां का किते भी, ना सही भा थ्यारा रै,
फिरगा मोह माया का जाल,
गाम हो लिए सैं कंगाल।।
सारै रीति रिवाज मिटगे, कोए नोंदा नंुधार नहीं,
भाई-भाई न मारदे, किसे का भी प्यार नहीं,
गोड़ा नुवाण जाणा हो तो, कोए जाण नै तैयार नहीं,
सारै जणे पागल होरे, कोए रहा समझदार नहीं,
या भूंडी बणी कसूती ढाल,
गाम हो लिए सैं कंगाल।।
छोटी-छोटी बातां पै, होज्या बड़ा रौला रै,
थापड़-गुस्से की लड़ाई म्हं, उठ जा सै गोला रै,
खांच कै नै थापड़ लागज्या, होज्या छोरा धोला रै,
पुलिसिएं भी मजे लेरे, लुटै आदमी भोला रै,
सरपंचणी भी खागी माल,
गाम हो लिए सैं कंगाल।।
क्यातैं भूलगे रै लोगो ताम, थामनै कोए ख्याल नहीं,
के होगा थारे बालकां का, उनकी कोए रूखाल नहीं,
कहै भुरटाणे आला, अर्ै यो सतासी का काल नहीं,
कंवल की ना मानी तो, टूटै माया का जाल नहीं,
यो सन्दीप पूछै एक सवाल,
गाम हो लिए सैं कंगाल।।
संदीप कंवल भुरटाना
लो भाईयो तीज का मौका पै एक और गीत तारै नाम
जमा ताजा इबे लिखकै भेजू सूं,,,,,,,,,ठेठ हरियाणवी म्हं
सारे भाईयां नै लोग अर लुगाईयां, चाचा नै ताईया, बहु अर जमाईयां नै,,,,,तीज की ढेर सारी बधाईयां
छोरा गिरकाणा लागै घणा स्याणा, उठदी ए डाला पै चढाया
तीज का दिन यारों, मैं पींग घाल के आया।।।।।ं
सारे जणे मिलके झूलो,
पुराणे रीति-रिवाज ना भूलो,
दारू पी-पी ना रै टूलो सारा तई समझाया।ं
यो छोरा भुरटाणे का, पींघ घाल के आया।।
पींग शिखर आसमान चढाई
सासु का नाक तोड के लाई
सबेरे पहला फेसबुक आलो रै, कसूता मजा आया
यो छोरा भुरटाणे का, पींघ घाल के आया।।
गामां के सब रंग बदलगे,
त्यौहार मनाण के ढंग बदलगे
सबेरे पहलां मेरा बाबु, बरफी का डब्बा लाया।ं
यो छोरा भुरटाणे का, पींघ घाल के आया।।
हलवा सुहाली कोए ना मणावै,
समोसे, रसगुल्ल्ेा चाउमीन खावै,
पेट म्हं आफारा आवै, फेर इन्नो पाणी म्हं मिलाया
गैस का गोला फूटा भाइयों एटम बम्ब बणाया
साच्ची बात लिखके करै चाला
संदीप कंवल भुरटाणे आला
आपणे सारा का राम रूखाया, इबे यो गीत बणाया
दो मिनट लागण कोन्या दी, रत्नावली पै चढाया
यो छोरा भुरटाणे का, पींघ झूल के आया।।
संदीप भुरटाणियां
जमा ताजा इबे लिखकै भेजू सूं,,,,,,,,,ठेठ हरियाणवी म्हं
सारे भाईयां नै लोग अर लुगाईयां, चाचा नै ताईया, बहु अर जमाईयां नै,,,,,तीज की ढेर सारी बधाईयां
छोरा गिरकाणा लागै घणा स्याणा, उठदी ए डाला पै चढाया
तीज का दिन यारों, मैं पींग घाल के आया।।।।।ं
सारे जणे मिलके झूलो,
पुराणे रीति-रिवाज ना भूलो,
दारू पी-पी ना रै टूलो सारा तई समझाया।ं
यो छोरा भुरटाणे का, पींघ घाल के आया।।
पींग शिखर आसमान चढाई
सासु का नाक तोड के लाई
सबेरे पहला फेसबुक आलो रै, कसूता मजा आया
यो छोरा भुरटाणे का, पींघ घाल के आया।।
गामां के सब रंग बदलगे,
त्यौहार मनाण के ढंग बदलगे
सबेरे पहलां मेरा बाबु, बरफी का डब्बा लाया।ं
यो छोरा भुरटाणे का, पींघ घाल के आया।।
हलवा सुहाली कोए ना मणावै,
समोसे, रसगुल्ल्ेा चाउमीन खावै,
पेट म्हं आफारा आवै, फेर इन्नो पाणी म्हं मिलाया
गैस का गोला फूटा भाइयों एटम बम्ब बणाया
साच्ची बात लिखके करै चाला
संदीप कंवल भुरटाणे आला
आपणे सारा का राम रूखाया, इबे यो गीत बणाया
दो मिनट लागण कोन्या दी, रत्नावली पै चढाया
यो छोरा भुरटाणे का, पींघ झूल के आया।।
संदीप भुरटाणियां
Wednesday, July 13, 2011
संदीप कंवल भुरटाना
म्हारे गामां का रंग भी न्यारा हो गया
हर जगां टूटा भाईचारा हो गया
पहलां नई बहु कुए पै जाया करदी
...छम छम छलकाकै पाणी लाया करदी
म्हारां कुए का पाणी भी खारा हो गया
पहला मिलजुल के लोग रहया करदे
सुख दुख अपणे वे सहया रै करदे
जमीदार का बेटा भी आवारा हो गया
पहला गामा म्हं सांग म्हं बुलाया करदे
ब्याह के वाणा म्हं ढोल बजाया करदे
इब तो डीजे भी सबनै प्यारा हो ग्या
तीज पींग पै बिठाकै झुलाया करदी
गीत सामण के वो गाया करदी
ब्याह म्ह सिटणे देके हंसाया करदी
कोर्ट आला ब्याह भी बटाधारी हो गया
सबे कित इब तो घलु घारा हो गया
छोरा गाम का भी गात तै भारा हो गया
रोज खादां गोलगप्पे टिक्की बरगर समोसे
संदीप कअ् पेट म्हं भी आफारा हो गया
म्हारे गामां का रंग भी न्यारा हो गया
हर जगां टूटा भाईचारा हो गया
हर जगां टूटा भाईचारा हो गया
पहलां नई बहु कुए पै जाया करदी
...छम छम छलकाकै पाणी लाया करदी
म्हारां कुए का पाणी भी खारा हो गया
पहला मिलजुल के लोग रहया करदे
सुख दुख अपणे वे सहया रै करदे
जमीदार का बेटा भी आवारा हो गया
पहला गामा म्हं सांग म्हं बुलाया करदे
ब्याह के वाणा म्हं ढोल बजाया करदे
इब तो डीजे भी सबनै प्यारा हो ग्या
तीज पींग पै बिठाकै झुलाया करदी
गीत सामण के वो गाया करदी
ब्याह म्ह सिटणे देके हंसाया करदी
कोर्ट आला ब्याह भी बटाधारी हो गया
सबे कित इब तो घलु घारा हो गया
छोरा गाम का भी गात तै भारा हो गया
रोज खादां गोलगप्पे टिक्की बरगर समोसे
संदीप कअ् पेट म्हं भी आफारा हो गया
म्हारे गामां का रंग भी न्यारा हो गया
हर जगां टूटा भाईचारा हो गया
संदीप भुरटाना
डाट लो उन झालां नै जो इबे गुजरी नहीं सै
आंत दुखै ब्होत सै, इबे कती बिखरी नहीं सै,
अर् एक बै प्यार तै बुला के तो देख तु,
घाव भर जांगे सारे, जो इबे दिखरी नहीं सै।।
आंत दुखै ब्होत सै, इबे कती बिखरी नहीं सै,
अर् एक बै प्यार तै बुला के तो देख तु,
घाव भर जांगे सारे, जो इबे दिखरी नहीं सै।।
SanSkrita Badalgi........mere Bhaiyo
सन्दीप कंवल भुरटाना
किमे भी तो ना मिलता, इस पीणे खाणें म्हं,
कुछै भी तो बचा नहीं, इस म्हारे हरियाणे म्हं।।
आज काल की छोरियां नै सूट पहरणै छोड़ दिए
...पहलां आलै रीति-रिवाज, एक झटकै म्हं तोड़ दिए,
जो देखे थे सपने लख्मी नैं, वे नुए सारे रोड़ दिए,
बदल गरी तेरी रागनी दादा, गीत तेरे सब मोड़दिए,
कोए भी तो डरता कोन्या, रोज जायावैं थाणे म्हं।
खेती करणिया किसान की, कमर तो्रडी सरकारां नैं,
क्दे लाठी,कदे गोली मारी, कै बिगाड़ा था बिचारां नै,
निर्दोस आदमी नै जिदे मारदे, ना पकडै हत्यारां नै,
उल्टे काम मिनट म्हं करदे, के गाड़ा इन सारा नैं
जोड़-तोड के गाणा गावैं, ना गाणा आवैं गाणे म्हं।
मां-बात नैं घर नै काढ़दे, इसी-इसी औलाद होरी दादा,
ताई भी दुख देख-देख के, इसे सोच म्हं खोरी दादा,
दिन पुराने उल्टे आजा, गावैं गीत फेर छोरी दादा,
काम सारे तू ठीक बणादै, ना मरेै कोए गौरी दादा,
पूरा माणस होग्या आधा, रोज कोर्ट कचहरी जाणे म्हं।
जिद तैं हरियाणे म्हं फैसन की आंधी आई सै,
इस बीमारी नै तो म्हारी इज्जत तार बगाई सै,
छोटे-छोटे लतडे़ सिमंे, टेलर भी होरे हाई सैं,
बेरा तै भी पाटै कोना,ये माणस सै के लुगाई सै,
क्ह सन्दीप भुरटाणे आला, इब मरै आदमी उल्हाणे म्हं,
कुछै भी तो बचा नहीं, इस म्हारे हरियाणे म्हं।।
Sandeep Bhurtania
किमे भी तो ना मिलता, इस पीणे खाणें म्हं,
कुछै भी तो बचा नहीं, इस म्हारे हरियाणे म्हं।।
आज काल की छोरियां नै सूट पहरणै छोड़ दिए
...पहलां आलै रीति-रिवाज, एक झटकै म्हं तोड़ दिए,
जो देखे थे सपने लख्मी नैं, वे नुए सारे रोड़ दिए,
बदल गरी तेरी रागनी दादा, गीत तेरे सब मोड़दिए,
कोए भी तो डरता कोन्या, रोज जायावैं थाणे म्हं।
खेती करणिया किसान की, कमर तो्रडी सरकारां नैं,
क्दे लाठी,कदे गोली मारी, कै बिगाड़ा था बिचारां नै,
निर्दोस आदमी नै जिदे मारदे, ना पकडै हत्यारां नै,
उल्टे काम मिनट म्हं करदे, के गाड़ा इन सारा नैं
जोड़-तोड के गाणा गावैं, ना गाणा आवैं गाणे म्हं।
मां-बात नैं घर नै काढ़दे, इसी-इसी औलाद होरी दादा,
ताई भी दुख देख-देख के, इसे सोच म्हं खोरी दादा,
दिन पुराने उल्टे आजा, गावैं गीत फेर छोरी दादा,
काम सारे तू ठीक बणादै, ना मरेै कोए गौरी दादा,
पूरा माणस होग्या आधा, रोज कोर्ट कचहरी जाणे म्हं।
जिद तैं हरियाणे म्हं फैसन की आंधी आई सै,
इस बीमारी नै तो म्हारी इज्जत तार बगाई सै,
छोटे-छोटे लतडे़ सिमंे, टेलर भी होरे हाई सैं,
बेरा तै भी पाटै कोना,ये माणस सै के लुगाई सै,
क्ह सन्दीप भुरटाणे आला, इब मरै आदमी उल्हाणे म्हं,
कुछै भी तो बचा नहीं, इस म्हारे हरियाणे म्हं।।
Sandeep Bhurtania
Monday, July 11, 2011
बेटी नअ् मरवाओग तो बहु कडे तै लाओगे
संदीप कंवल भुरटाना
म्हारे हरियाणे के पंचायती अर् ठोलेदारां नै कहूं सूं अक् ताम बिना काम चौधर अर् मर्दानगी के पाले मांडे हांडण लाग रै सो, असलियत या सै तारी चौधर अर् मर्दानगी कुरडिया पै लहू लूहाण पडी सै---रै मेरे साथियो एक बार इस लक्ष्मी नै धरती पै आण दो--------बेटी नअ् मरवाओग तो बहु कडे तै लाओगे‘‘‘‘‘‘‘‘‘‘‘‘‘‘
मां के गर्भ म्हं इस कन्या पै, मत ना छुरी चलाओ।
दया धर्म का खोज रह्या ना, मत ना जुल्म कमाओ।।
छोरी का भी इस दुनिया म्हं, आवण का हक पूरा सै,
मात-पिता के संग म्हं खेल्या, खावण का हक पूरा सै,
करकै बी ़ए ़एम ़ए फैदा, ठावण का हक पूरा सै,
ब्याह करवाकै साजन के घर, जावण का हक पूरा सै,
छोरा-छोरी एक बराबर, यो सारा भेद मिटाओ।
दया धर्म का खोज रह्या ना, मत ना जुल्म कमाओ।।
छोरी तै क्यूं नफरत सुणल्यो, कान खोलकै सारे,
काम नहीं यो इन्सानां का, क्यूं बणरै हत्यारे,
वो दिन दूर नहीं सै छोरे, हाडैं मारे मारे,
भोत घणी कम होग्यी छोरी, रहज्यां घणे कंवारे,
होज्यागी दुनिया म्हं हांसी, मत ना लोग हंसाओ।
दया धर्म का खोज रह्या ना, मत ना जुल्म कमाओ।
डी सी एस पी एम पी एम एल ए, छोरी चढ़ी शिखर म्हं,
बणरी सैं प्रधानमन्त्री, के फैदा घणे जिकर म्हं ,
अपणी किस्मत आप बणावैं, बैठे सोच फिकर म्हं,
न्यूं चमकै सैं छोरी सारै, जणु तारे अम्बर म्हं,
किसे चीज म्हं घाट नहीं सें, बेशक नजर घुमाओ।
दया धर्म का खोज रह्या ना, मत ना जुल्म कमाओ।।
बिना खोट में कितणी कन्या, नींद सदा की सोल्यी,
बन्द करो या बड़ी बीमारी, भोत घणी हद होली,
मेरे जन्म की खुशी मनाइयो, मां के पेट तैं बोल्यी,
इस दुनिया म्हं छोरी सै एक, चीज बड़ी अणमोली,
कह संदीप भुरटाणे आला, न्यूं सबनै समझाओ।
दया धर्म का खोज रह्या ना, मत ना जुल्म कमाओ।।
म्हारे हरियाणे के पंचायती अर् ठोलेदारां नै कहूं सूं अक् ताम बिना काम चौधर अर् मर्दानगी के पाले मांडे हांडण लाग रै सो, असलियत या सै तारी चौधर अर् मर्दानगी कुरडिया पै लहू लूहाण पडी सै---रै मेरे साथियो एक बार इस लक्ष्मी नै धरती पै आण दो--------बेटी नअ् मरवाओग तो बहु कडे तै लाओगे‘‘‘‘‘‘‘‘‘‘‘‘‘‘
मां के गर्भ म्हं इस कन्या पै, मत ना छुरी चलाओ।
दया धर्म का खोज रह्या ना, मत ना जुल्म कमाओ।।
छोरी का भी इस दुनिया म्हं, आवण का हक पूरा सै,
मात-पिता के संग म्हं खेल्या, खावण का हक पूरा सै,
करकै बी ़ए ़एम ़ए फैदा, ठावण का हक पूरा सै,
ब्याह करवाकै साजन के घर, जावण का हक पूरा सै,
छोरा-छोरी एक बराबर, यो सारा भेद मिटाओ।
दया धर्म का खोज रह्या ना, मत ना जुल्म कमाओ।।
छोरी तै क्यूं नफरत सुणल्यो, कान खोलकै सारे,
काम नहीं यो इन्सानां का, क्यूं बणरै हत्यारे,
वो दिन दूर नहीं सै छोरे, हाडैं मारे मारे,
भोत घणी कम होग्यी छोरी, रहज्यां घणे कंवारे,
होज्यागी दुनिया म्हं हांसी, मत ना लोग हंसाओ।
दया धर्म का खोज रह्या ना, मत ना जुल्म कमाओ।
डी सी एस पी एम पी एम एल ए, छोरी चढ़ी शिखर म्हं,
बणरी सैं प्रधानमन्त्री, के फैदा घणे जिकर म्हं ,
अपणी किस्मत आप बणावैं, बैठे सोच फिकर म्हं,
न्यूं चमकै सैं छोरी सारै, जणु तारे अम्बर म्हं,
किसे चीज म्हं घाट नहीं सें, बेशक नजर घुमाओ।
दया धर्म का खोज रह्या ना, मत ना जुल्म कमाओ।।
बिना खोट में कितणी कन्या, नींद सदा की सोल्यी,
बन्द करो या बड़ी बीमारी, भोत घणी हद होली,
मेरे जन्म की खुशी मनाइयो, मां के पेट तैं बोल्यी,
इस दुनिया म्हं छोरी सै एक, चीज बड़ी अणमोली,
कह संदीप भुरटाणे आला, न्यूं सबनै समझाओ।
दया धर्म का खोज रह्या ना, मत ना जुल्म कमाओ।।
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