Wednesday, May 9, 2012

जड भी जावां हाम औडे छाया करां

गाम गुवांड म्हं नाम होरा सै आपणा
जड भी जावां हाम औडे छाया करां

किसा ए टोपिक चालरा हो किते भी
 उसे पै एंडी चुटकला सुणाया करां


जै रोण नै होरे किसे बात पै सारै
सुणा के कविता सबनै हंसाया करां

जै नाम लेके चुटकला सुणांदा हो
इज्जत उसकी तार बगाया करां


आदमी गैलयां दस मिनट बतलादी ए
उसपै एक गजल जिदे बणाया करां
 

संदीप का काम लिखण का रहगा इब
फसजा माईक किते धूमां औडे ठाया करां

1 comment:

रश्मि प्रभा... said...

http://vyakhyaa.blogspot.in/2012/10/blog-post_27.html